गौरेला-पेंड्रा-मरवाही-छात्रावास संचालन और शिक्षण कार्य की दोहरी जिम्मेदारी पर उठे सवाल, प्रभारी अधीक्षकों को पूर्णकालिक दायित्व देने की मांग

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले सहित प्रदेश के विभिन्न छात्रावासों में प्रभारी अधीक्षक के रूप में कार्यरत सहायक शिक्षकों एवं शिक्षकों ने दोहरी जिम्मेदारी की व्यवस्था पर पुनर्विचार की आवश्यकता जताई है। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में एक ही कर्मचारी को विद्यालय में शिक्षण कार्य के साथ-साथ छात्रावास संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे दोनों व्यवस्थाओं के प्रभावी संचालन में व्यावहारिक कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं।
जानकारी के अनुसार, कई छात्रावासों में नियमित अधीक्षकों के पद रिक्त होने के कारण शिक्षकों एवं सहायक शिक्षकों को प्रभारी अधीक्षक के रूप में दायित्व दिया गया है। ऐसे कर्मचारियों का कहना है कि छात्रावास संचालन अपने आप में पूर्णकालिक जिम्मेदारी है, जिसमें विद्यार्थियों की सुरक्षा, भोजन व्यवस्था, स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताएं, अनुशासन, दैनिक गतिविधियों की निगरानी तथा विभिन्न प्रशासनिक कार्य शामिल हैं।

दूसरी ओर, विद्यालय में नियमित शिक्षण कार्य, परीक्षा संबंधी दायित्व, विभागीय बैठकों और शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी उन्हीं कर्मचारियों पर रहती है। ऐसे में दोनों संस्थाओं के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है, जिसका असर छात्रावास एवं विद्यालय दोनों की कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है।
नियमित अधीक्षकों की भर्ती तक वैकल्पिक व्यवस्था की मांग

प्रभारी अधीक्षकों का कहना है कि जब तक नियमित छात्रावास अधीक्षकों की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक उन्हें केवल छात्रावास संचालन का दायित्व सौंपा जाना चाहिए। उनका सुझाव है कि आवश्यकता पड़ने पर निकटस्थ विद्यालय में सीमित अवधि के लिए एक या दो कालखंड शिक्षण कार्य हेतु आदेश जारी किया जा सकता है, लेकिन छात्रावास की जिम्मेदारी निभा रहे कर्मचारियों को दोनों संस्थाओं का पूर्ण दायित्व एक साथ सौंपना व्यावहारिक नहीं है।
विद्यार्थियों के हित को बताया सर्वोपरि

मांग करने वाले शिक्षकों का कहना है कि यह विषय केवल कर्मचारियों की सुविधा से जुड़ा नहीं है, बल्कि छात्रावासों में निवासरत विद्यार्थियों की सुरक्षा, देखरेख और गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं से सीधे तौर पर संबंधित है। उनका मानना है कि यदि प्रभारी अधीक्षक पूर्णकालिक रूप से छात्रावास में उपलब्ध रहेंगे तो विद्यार्थियों की समस्याओं का त्वरित समाधान होगा और छात्रावासों का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
शासन से शीघ्र निर्णय की अपेक्षा
प्रभारी अधीक्षकों एवं संबंधित कर्मचारियों ने शासन और विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि छात्रहित को ध्यान में रखते हुए वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा की जाए तथा नियमित अधीक्षकों की नियुक्ति होने तक एक व्यवहारिक एवं प्रभावी कार्यप्रणाली लागू की जाए, जिससे शिक्षा व्यवस्था और छात्रावास प्रबंधन दोनों को बेहतर बनाया जा सके।









